मनोहरपुर: कांवड़ियों की सेवा में शिव महिमा कांवड़ियां संघ राउरकेला द्वारा निशुल्क चिकित्सा शिविर एवं भंडारे का हुए 31 साल.
मनोहरपुर, 12 जुलाई — सावन माह की शुरुआत के साथ ही झारखंड-ओड़िशा सीमावर्ती क्षेत्र के प्रसिद्ध महादेवसाल शिव मंदिर में बाबा भोलेनाथ के जलाभिषेक हेतु कांवड़ियों का आगमन प्रारंभ हो गया है। श्रद्धालुओं की पहली जत्था आगामी सोमवारी को जलाभिषेक कर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करेगी।इस पावन अवसर पर राउरकेला स्थित श्री श्री शिव महिमा कांवड़ियां संघ बिश्रा रोड राउरकेला ओड़िसा के द्वारा शनिवार को मनोहरपुर स्टेशन परिसर में निशुल्क चिकित्सा शिविर एवं भंडारे का आयोजन किया गया।
यह सेवा कार्य संघ द्वारा विगत तीन दशकों से यानी 31 सालों से लगातार किया जा रहा है, जो कांवड़ियों की सेवा भाव और श्रद्धा को दर्शाता है। संघ के संस्थापक एवं मुख्य संचालनकर्ता ईश्वरदास मित्तल ने जानकारी देते हुए बताया कि, “यह सेवा कार्य राउरकेला के धर्मप्रेमियों के आर्थिक सहयोग और संघ के समर्पित सदस्यों की सहभागिता से संभव हो सका है। हमारा उद्देश्य है कि दुर्गम मार्गों से होकर आने वाले कांवड़ियों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए।”गौरतलब है कि ओड़िशा के राउरकेला स्थित वेदव्यास संगम तट से जल लेकर लगभग 110 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा कर श्रद्धालु महादेवसाल मंदिर पहुंचते हैं।
यह मार्ग घने जंगलों, पथरीले पहाड़ों और कठिन चढ़ाई से युक्त है, जिसमें पड़ाव के दौरान बिश्रा, मनोहरपुर व पोसैता जैसे स्थानों पर विभिन्न स्वयंसेवी धार्मिक संस्थाओं द्वारा सेवा शिविर लगाए जाते हैं। मनोहरपुर-गोइलकेरा के मध्य स्थित महादेवसाल मंदिर को झारखंड का मिनी बाबा धाम कहा जाता है, जहां सावन में झारखंड, ओड़िशा समेत देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों कांवड़िए बाबा भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक हेतु पहुंचते हैं।वहीं इन तीन दशकों से पूर्व और वर्तमान समय में निःस्वार्थ भाव से शिव भक्त कांवड़ियों की सेवा कार्य में संघ के स्थापना काल से ही पूर्व और वर्तमान में वरिष्ठ सदस्य नंदलाल साह, अर्जुन साह उर्फ मुन्नू सेठ,यदुनंदन साह उर्फ साधु जी, कमल कौशल, आनंद अग्रवाल, अमित प्रसाद, रवी कुमार साव, विक्की सिंह, सूरज मिश्रा, पंकज मूलचंदानी , सोनू सिंह, मोनू सिंह, सरदार प्रताप सिंह,राजेश जायसवाल,बिनोद गुप्ता,प्रशांत साहु ,विकास साहु ,दिलीप गुप्ता एवं पूजा यादव ,भारती कुमारी सहित अन्य कार्यकर्ताओं की विशेष भूमिका रही। सभी सदस्य कांवड़ियों की सेवा में पूरी तन्मयता से लगे रहे, जिससे शिविर का संचालन अत्यंत व्यवस्थित और सफल रहा।
वहीं इस धार्मिक आयोजन ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि सेवा ही सच्ची भक्ति है, और कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सहयोग, समर्पण और सामूहिक भावना का जीवंत उदाहरण है।