आदिवासी कुड़मि समाज पश्चिमी सिंहभूम, डहरे टुसू संचालन समिति की पहल,

2026 से मनोहरपुर क्षेत्र में भव्य रूप से होगा पारंपरिक टुसू परब का आयोजन

मनोहरपुर: आदिवासी कुड़मि समाज पश्चिमी सिंहभूम के अंतर्गत डहरे टुसू संचालन समिति ने आगामी वर्ष 2026 से मनोहरपुर क्षेत्र में पारंपरिक टुसू परब को बृहद और भव्य रूप में आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस आयोजन के तहत मकर संक्रांति महोत्सव यानी टुसू परब मानने वाले क्षेत्र के सभी ग्रामों को आमंत्रित किया जाएगा तथा ग्रामीणों को टुसू परब से जुड़ी पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी जाएगी।संचालन समिति ने बताया कि बीते कई वर्षों से शहरी प्रभाव और चकाचौंध के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक पर्व-त्योहारों की मूल परंपराएं धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगी थीं। कई गांवों में टुसू परब मनाने की गलत पद्धतियां प्रचलन में आ गई थीं, जिससे पारंपरिक संस्कृति धूमिल हो रही थी। इसे देखते हुए समिति ने निर्णय लिया है कि टुसू परब को पारंपरिक रीति और सांस्कृतिक मूल्यों के आधार पर व्यापक स्तर पर मनाया जाएगा।समिति के अनुसार, टुसू परब की परंपरा में खेत में स्थित धान के अंतिम गुच्छे को ‘ठकुराइन’ कहा जाता है। विधिवत पूजन के पश्चात इस धान को खलिहान लाया जाता है। खलिहान में धान के बीड़ों की झड़ाई पूर्ण होने के बाद इसे घर लाकर पूरे विधि-विधान के साथ लालन-पालन करते हुए परब मनाया जाता है। टुसू को धान का प्रतीक माना जाता है, जिसे ‘चौड़ल’ में सुसज्जित कर उसकी आराधना की जाती है और इस कामना के साथ उत्सव मनाया जाता है कि हर वर्ष घर-आंगन में अन्न की कभी कमी न हो।डहरे टुसू मनोहरपुर संचालन समिति ने सभी ग्रामों से अपील की है कि वे अपनी-अपनी परंपरा के अनुसार चौड़ल बनाकर उसे सुसज्जित करें और 10 जनवरी 2026, शनिवार को नंदपुर चौक से शहीद निर्मल महतो चौक उन्धन तक आयोजित जुलूस में शामिल हों। इस दौरान संचालन समिति द्वारा बेहतर चौड़ल का चयन किया जाएगा और चयनित ग्रामों को ग्राम उन्धन मैदान में आयोजित सभा के दौरान सम्मानित व पुरस्कृत किया जाएगा।इसके साथ ही, उत्कृष्ट साज-सज्जा, पारंपरिक वेशभूषा एवं अन्य सांस्कृतिक परंपराओं का प्रभावी प्रदर्शन करने वाले ग्रामों को आमंत्रित अतिथियों के माध्यम से सम्मानित किया जाएगा। समिति का उद्देश्य पारंपरिक टुसू परब के सांस्कृतिक स्वरूप को सहेजते हुए नई पीढ़ी तक इसकी विरासत को सुदृढ़ रूप में पहुंचाना है।

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